क्षेत्रफल एवं सीमायें

औरैया जनपद उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पश्चिम भाग में 26021** से 27001** उत्तरी अक्षांस और 78045** और 79045** पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है और कानपुर डिवीजन का एक भाग है। इसके उत्तर में कन्नौज जनपद, पश्चिम में इटावा जनपद का भरथना तहसील और ग्वालियर जनपद से जुडा है। पूर्वी सीमा कानपुर देहात जिला और दक्षिण सीमा जालौन जनपद के साथ जुडा हुआ है। 1191- 92 के ऑकडो के अनुसार जनपद का कुल क्षेत्रफल 2054 वर्ग किमी0 है।

स्थलरूप

औरैया जनपद पूरी तरह से गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के मैदान में स्थित है। इसके भौतिक स्वरूप में काफी भिन्नता है जो वहाँ से गुजरने वाली नदियों व्दारा निर्धारित होता है। इटावा और औरैया जनपद को प्राकृतिक विषेशताओं के आधार पर चार भागो में विभाजित किया गया है इनमें से प्रथम यमुना नदी के लगभग समानान्तर पश्चिम से पूर्व की ओर सेंगर नदी के उत्तर पूर्व में स्थित है। इसमें इटावा तहसील तथा भरथना का उत्तरी भाग सम्मलित है। दूसरी विशेषता सेंगर नदी के दक्षिण में निहित है और जिसका विस्तार यमुना नदी की ओर उच्च भूमि के रूप में फैली हुयी है। यह इटावा और भरथना और औरैया जनपद के औरैया तहसील के अधिकांश भाग को घेरा हुआ है। यह भूभाग यमुना नदी से जुड़े हुये कुछ तहसीलों को भी सम्मलित किया हुआ है। यमुना के अतिरिक्त आगरा में तहसील बाह के सीमाओ से लेकर जहाँ सिन्धु,कुँवारी, चम्बल और यमुना नदी का संगम है, दोनो के बीच का भग उॅचा और टूटा हुआ है जिसे जानीब्रस्ट के रूप में जाना जाता है। यह भूभाग एक दूसरे से बिल्कुल अलग है लेकिन हर भूभाग अपनी सीमा के भीतर सामान्य अनुरूप प्रस्तुत करता है।

स्तर

औरैया और इटावा जनपद का कुछ भाग संयुक्त रूप् से यमुना के उ0 में बसा हुआ है। लेकिन उसके स्तर में बहुत ज्यादा अन्तर नही है। इसे इस प्रकार वर्णित किया जा सकता है, कि मैदान का विभाजन उथली नदियों व्दारा हुआ है। जो अहन्या, सेंगर, रिन्द, जैसी छोटी नदियों व्दारा बना है और इसका ढाल उ0पश्चिम में दक्षिण पूर्व की ओर है। जनपद के आर पार उत्तर से दक्षिण की ओर दो मील की दूरी पर इटावा तहसील में हरदोई के दक्षिण पूर्व में एक स्तर की रेखा लिया गया है। जिसकी समुद्रतल से अंकित उॅचाई मैनपुरी सीमा पर कारी गाँव के निकट 191 फीट है जिसके नजदीक इटावा से जसवन्त नगर रोड पर पुर्वी भारतीय रेलवे का सराय भूपत स्टेशन है। सेंगर नदी का तल इससे 20 फीट नीचे है जबकि अंकित स्तर 171 फीट है इटावा नहर का शाखा इस भूभाग के केन्द्र में बीचो बीच प्रवाहित होता है और इसका स्तर दक्षिण पूर्व ढलान को स्पष्ट रेखांकित करता है। हरदोई में अंकित उॅचाई 50053 फीट भरथना के पास 482 फीट तथा छछून्द में 474 फीट और कंचैसी के पास कानपुर सीमा पर 459 फीट है। ट्रांस यमुना भूभाग की उॅचाई अंकितन नही की गयी हैं पर जनपद का यह भूभाग कुछ हद तक उॅचाई पर स्थिति है। क्योकि यह अनुप्रस्थ भाग इतना सकरा एवं टूटा हुआ है कि यह अपने सामान्य समोच्च की पर्याप्त व्याख्या कर देता हे। जबकि शेष जनपद में ढलान उत्तर -पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर है।

मिट्टी

पचार और घर भूभाग की मिट्टियाँ दोमट या लोम, भटियार या क्ले और मुड या बालू की विशेषता वाली है। इसके अतिरिक्त हर जगह क्ले मिलता है जहाँ वर्षा के समय पानी इकटठा हो जाता है और यहाँ केवल चावल ही उगा सकते हे। इस क्ले मिटटी के तल को झाबर के रूप में जाना जाता हैं कुर्का और ट्रांस यमुना भूभाग में कुछ अन्य प्रकार की भी मिट्टियाँ मिलती है। नदी के बिहडो और उसके निकटवर्ती भूमि में कंकड और बजरी पाया जाता है। जिसे पकर कहा जाता है। वास्तव में यह सिकता मिटटी और बजरी पाया जाता है जिसे पकर कहा जाता है। वास्तव में यह सिकता मिटटी और बजरी का मिश्रण है। विहड़ के नीचले भागो में और व्यापक घाटियों के बीच में यमुना के बाढ से निर्मित मिटटी को कट्टार कहा जाता है। नदियों के किनारे जलोढ मिटटी का जमाव पाया जाता है। जिसे तीर के रूप में जाना जाता है। कट्टार और तीर दोनो मिटटी के गुणवत्ता में काफी भिन्नता है। इस मिटटी की कुछ बनाबट लाल मिटटी से मिलकर बनता है जो उसे उच्च गुणवत्ता प्रदान करता है जबकि अन्य भाग काले रंग के दोमट से बना है, और दूसरा रेतीली उपस्थिति में और कम उपजाऊ है।

नदियाँ

यमुना

यमुना नदी सर्वप्रथम जनपद के भवट ग्राम की सीमा को स्पर्श करती है और यह ग्राम इटावा तहसील के उत्तर पश्चिम में स्थिति है औरैया और आगरा के बीच में यह 24 किमी0 की सीमा बनाती हैं और इसके बाद आगे प्रवाहित होती हुयी दक्षिण पूर्व दिशा की ओर जाती है जब तक कि यह हरौली ग्राम के निकट महत्वपूर्ण वक्र का निर्माण न कर ले पर इससे पहले भरेह में यह चम्बल के पानी को इकटठा करती है। आगे कुछ ओर नदी इसमें आकर मिलती है जिसके कारण यह तेजी से दक्षिण दिशा में मुढ जाती है। और दुबारा पूर्व की ओर प्रवाहित होने लगती है। इसके पश्चात इसका भाग लगभग पूर्व में ही चलता हुआ इस जनपद ओर जालौन जनपद के बीच संयुक्त सीमा बनाती है। इस जनपद में यमुना नदी की कुल लम्बाई 112 किमी0 है। एक तरफ नदी का किनारा असमान्य रूप से खड़ा और तेज है और दूसरी तरफ नीचा है जहाँ नदी वर्षा के समय उपर प्रवाहित होने लगती है। इस कारण नदी बाढ के समय में ज्यादा फैलती है। इसके सतह का वेग छोटा किया जा रहा है जिसके कारण यह वारिस में बहुत वृहत भूभाग को घेरकर उस पर जलोढ मिटटी का जमाव करती है। यह यमुना की स्वभाविक प्रवृत्ति हैं कि यह अपने किनारो पर भूमि को अनडयूलेट करती है और जब यह अपने दाये किनारे पर चम्बल से मिलती है तो इसका यह कार्य बढ़ जाता है।

चम्बल

यमुना नदी के दक्षिण में चम्बल नदी बहती है। जो विन्ध्यन भाग के उत्तरी ढाल में महु के पास स्थित मालवा से निकलती है। यह नदी औरैया जनपद को सबसे पहले इटावा तहसील के ट्रांस यमुना भूभाग में स्थित मुरांग गांव को स्पर्श करती है और जनपद तथा मध्य प्रदेश राज्य के साथ 40 किमी0 की सीमा बनाती है। पहली बार यह नदी भरेच्छा में इस जिले के सम्बन्धित भूमि से अन्य दिशा में चली जाती है। और शेष आगे का 35 किमी0 जनपद में प्रवाहित होती है। भरेह में यमुना के साथ अपना संगम बनाती है वहीं पर एक बड़ी लेकिन कम वक्र का निर्माण करती है। उपस्थिति और चरित्र में चम्बल नदी बारिकी से यमुना जैसा दिखती है और इस जनपद में दोनों नदी का समान विस्तार है। जलोढ़ मैदान का निर्माण करने से पहले यह नदी भारी बाढ़ लाती है जो इस नदी के तली के तिव्र ढाल के कारण आता है। चम्बल नदी की धारा का वेग तिव्र होता है इसलिये यह यमुना से ज्यादा से ज्यादा पानी की मात्रा निर्वहन करती है। इस नदी का पानी एकदम क्रिस्टल की तरह साफ होता है, इसलिये चम्बल का पानी यमुना से मिलने के बाद भी कुछ दूरी तक अलग किया जा सकता है। क्योंकि यमुना नदी के पानी में हमेशा रेत या मिट्टी लटकती रहती है। चम्बल शायद ही कभी अपने किनारे पर ज्यादा पानी ले आती है। इस नदी की धारा बहुत ही पतली है जिससे सिल्ट का ज्यादा जमाव नहीं हो पाता है। इसलिये चम्बल नदी का जो जलोढ़ मिट्टी होता है वह यमुना नदी का तुलना में कम होता है।

कुंवारी

यह नदी भी यमुना की सहायक नदी है। यह नदी मध्य प्रदेश के साथ 16 किमी0 तक जनपद की सीमा बनाती है। और उसके बाद इतनी ही दूरी तक और प्रवाहित होने के बाद यमुना से मिल जाती है। चम्बल नदी जहा यमुना नदी से मिलती है उसके 8 किमी0 पहले ही यह नदी यमुना से मिल जाती है। मध्य प्रदेश के मोरर टाउन के पास से यह नदी निकलने के बाद उत्तर-पश्चिम,उत्तर-पूर्व, फिर और अन्त में दक्षिण-पूर्व में अर्द्ध वृत्ताकार रुप में प्रवाहित होती है। जब तक कि औरैया जनपद के अत्यन्त दक्षिण में सिन्ध नदी इसमें मिल नहीं जाती है। सिन्ध में मिलने के बाद कभी कभी इसको सिन्ध नदी का नाम दिया जाता है जो बाद में वर्षा के समय ज्यादा पानी आ जाता है। और ग्रीष्म मौसम में नदी कमजोर हो जाती है। यमुना और चम्बल के संगम से लेकर सिन्ध और यमुना के संगम के बीच का भू भाग पचनद के नाम से जाना जाता है। वर्षा और जाड़े के मौसम में इसका दृश्य बहुत सुन्दर होता है लेकिन ग्रीष्म मौसम के दौरान यह शुष्क अन्तर में बदल जाता है।

सेंगर और सिरसा

यह इटावा में धनुहा गाँव के निकट से प्रवेश करती है। जो इटावा तहसील के अन्तर में बसा हुआ है। यह जनपद में यमुना के समानान्तर दक्षिण-पूर्व दिशा में प्रवाहित होती हुयी कानपुर जनपद में चली जाती है। अपने प्रवाह क्षेत्र के उपरी भाग में यह धारा बहुत महत्व नही रखती है। अपने प्रवाह क्षेत्र के उपरी भाग में यह धारा बहुत महत्व नही रखती है। यह भाग नीचे है और इसके किनारे सामान्यतः कृषि योग्य है। अमृतपुर जो 6 किमी0 की दूरी पर इटावा टाउन के उत्तर में बसा हुआ है। वहाँ पर यह सिरसा नदी से मिल जाती है। यहा पर सिरसा नदी इसकी ओर अभिमुख होने की कोशिश करती है। इसके बाद सेंगर नदी एक गहरी घाटी से प्रवाहित होती है। और आस पास के भूभाग की अपवाह इसके किनारों को बिहड़ के रुप में बदल देती है, जो तुलनात्मक रुप से यमुना के किनारों की आकृति बिगाड़ने वाले दरारों से केवल नगण्य है। जब यह नदी पूर्व की ओर प्रवाहित होती है। तो इसके विहड़ के विस्तार और चौड़ाई में वृद्धि हो जाती है। यह खेती के लिये पूरी तरह से अयोग्य है लेकिन यह स्थान चारागाह की दृष्टि से उपयोगी है और यहाँ बबुल और रिवान्ज के वृक्ष उगते है जौ लकड़ी और छाल के लिये मुल्यवान है। सिरसा नदी जो सेंगर नदी की एक शाखा है, वह जलेशर में उमरगढ़ के पास उससे अलग होती है। और इटावा में सेंगर से 17 किमी0 पश्चिम में प्रवेश करती है तथा जब तक इस धारा से मिल नहीं जाती तब तक एक अच्छी तरह से परिभाषित चैनल में प्रवाहित होती है। लेकिन यह एक छोटे आकार की है।

रिन्द और अरिन्द

यह नदी अलीगढ़ जनपद से उत्पन्न होती है। और इटावा में सर्वप्रथम भनखोरा गाँव में प्रवेश करती है, जो विधूना तहसील के उत्तर पूर्व सीमा पर स्थित है। यह नदी 11 किमी0 तक जनपद की सीमा के साथ प्रवाहित होने के बाद, यह शभद में दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और बिधूना से होते हुये मिएण्डर के रुप में दक्षिण-पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुयी कानपुर में चली जाती है। रिन्द एक बाहरमासी नदी है, जिसका आकार गर्मी के मौसम में सिकुड़ जाता है।लखना गाँव में यह नदी पूर्व की ओर मुड़ जाती है और अहनेमा और पुराहा नाम की दो सहायक नदियाँ इससे जुड़ती है।

अहनेमा और पुराहा

यह झीलों की श्रृंखला से निकलती है। इसमें पहली नदी ककन के पास से और दूसरी मैनपुरी जिले के सौज के पास निकलती है। यह अपवाह चैनल से भोड़ी बड़ी होती है, जो बहुत ज्यादा वर्षा का पानी इकट्ठा करती है। गर्म और ठण्डे मौसम में यह सामान्य रुप से सुखी रहती है। लेकिन वर्षा के समय पुराहा अपने सिनस कोर्स के कारण अपने किनारों पर बहुत सारी भूमि का कटाव करती है।

पाण्डु

यह इटावा जनपद की अकेली नदी है जो गंगा में मिलती है। जिसकी उत्पत्ति बिधूना तहसील के अत्यन्त उत्तर-पूर्व में शभद और नुपुर के बीच एक बड़े मिट्टी के अवसाद से बने झील से हुई है। यह फर्रुखाबाद जिले में पूर्व की ओर प्रवाहित होती है।

झील

जनपद में थोक से अधिक नदियों और उनके सहायक नदियों और वाटर कोर्स व्दारा निकली प्राकृतिक प्रवाह के सामान्य उत्कृष्ट झीलें और दलदल सामान्य विरलता का उदाहरण है। यहाँ क्ले स्तर के आस्तित्व ने खोखलेपन के व्यापकता के लिये अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान की है। जिनकी मौजुदगी अधिकतम जनपद की सीमाओं पर, विशेषरुप से विधूना तहसील में स्थित है। जहाँ वे कुछ हद तक प्राकृतिक अपवाह रेखा के प्रभाव से परे या नहरों के जुड़ाव से कृत्रिम रुप से बने कटाव है। इन झीलों में सबसे महत्वपूर्ण बिधूना तहसील में स्थित दुर्मान्गदपुर, मुण्डई,बरौली, औटौन,याकूबपुर, तिर्वा धूपकरी या धूलपीया और मनौरा है।

बंजर भूमि

जनपद में 1998 के अन्त तक बंजर भूमि का औसत क्षेत्रफल 8221 हेक्टेअर था। इस क्षेत्रफल में ऊसर भूमि को भी सम्मिलित किया गया है, जिसमें मिट्टी नमकीनपन की वजह से अनुपजाऊ हो जाती है, उसको रेह कहते है, और इसमें बिहड़ के जंगल को भी सम्मिलित किया गया है। हालाँकि इसमें पानी के नीचे का क्षेत्र और साइट, सड़कों से घिरी भूमि शामिल नहीं है जिसका क्षेत्रफल 16949 हेक्टेयर है।

जलवायु

वर्षा

जनपद में औसत वार्षिक वर्षा 792 मिमी0 है जिला सांख्यिकी पादिका ने जनपद में वर्ष 1998 में 738 मिमी0 वर्षा होने का संकेत दिया था। जिले की लगभग 85 प्रतिशत वार्षिक वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून से समय जून से सितम्बर माह में होती है तथा सबसे अधिक वर्षा वाला महीना अगस्त माह का होता है।.

तापमान

माह फरवरी के बाद तापमान में निरन्तर वृद्धि होती है। मई का महीना 42 सेटीग्रेट औसत दैनिक अधिकतम तापमान और 26 सेंटीग्रेट औसत दैनिक न्यूनतम तापमान के साथ सबसे गर्म महीना है। जबकि मई माह के अपेक्षा जून माह का रात्रि अधिक गर्म होती है। गर्मियों में गर्मी तीव्र हो जाती है। तथा गर्म शुष्क और धूल भरी पश्चिमी हवायें गर्मी के मौसम में आम है। जो मौसम को गम्भीर बना देते है। इस मौसम में लगभग प्रत्येक दिन तापमान कभी-कभी 46 सेन्टीग्रेट या इससे भी अधिक पहुँच जाता है। जनपद में जून के तिशरे सप्ताह में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के शुरुआत के साथ दिन के तापमान में प्रसंसनीय कमी होती है. और मौसम अधिक सहने योग्य हो जाता है। लेकिन रातें अभी भी गर्मियों के शेष रहने के कारण गर्म ही रहती है। सितम्बर के अन्त तक मानसून के धीर-धीरे जाने के साथ दिन के तापमान में मामूली वृद्धि होती है। मानसून के जाने के बाद रात्रि के तापमान में तेजी से कमी आती है। नवम्बर के बाद दिन एवं रात्रि दोनों के तापमान मं तेजी से गिरावट होती है। जो जनवरी माह तक होती है। तथा औसत दैनिक अधिकतम तापमान लगभग 23 सेंटीग्रेट और औसत दैनिक न्यूनतम तापमान लगभग 8 सेंटीग्रेट के साथ जनवरी माह सबसे ठण्डा महीना होता है। जनपद ठण्ड के मौसम में ठण्डी लहरों और कोहरे से प्रभावित है जिससे कभी-कभी न्यूनतम तापमान 3 सेन्टीग्रेट से भी नीचे चला जाता है।

आर्द्रता

वर्षा के मौसम के दौरान सापेक्षिक आर्द्रता आमतौर पर उच्च रहता है। जो 70 प्रतिशत से भी ज्यादा हो जाता है। इसके बाद आर्द्रता कम हो जाती है और गर्मी का मौसम जो वर्ष का शुष्कतम भाग है तब सापेक्षिक आर्द्रता दोपहर में 30 प्रतिशत से भी कम हो जाती है।

हवायें

आमतौर पर यहाँ हल्की हवायें चला करती है जिसकी दिशा ज्यादातर दक्षिण-पश्चिम और उत्तर पश्चिम के बीच होती है। मई के महीनें में दक्षिण- पश्चिम मानसूनी मौसमी हवायें कई दिनों तक उत्तर पूर्व और दक्षिण-पूर्व की दिशा में प्रवाहित होती है।