बैंकिग

क्षेत्र जो औरैया जिले से धिरा हुआ है, पड़ोसी क्षेत्र जो फर्रूखाबाद,मैनपुरी,कानपुर,आगरा,ग्वालियर का प्रतिनिधित्व करते हैं, के साथ समृद्ध व्यापार था। पूर्व में व्यापार काफी विस्तृत था, जब कानून व्यवस्था अच्छी थी परन्तु अराजक स्थितियों में तेजी आने के कारण व्यापार में कमी आती गयी। यद्यपि संचार के साधनों मे कमी थी तथापि व्यापार घोड़ों,खच्चरों और नावों के व्दारा होता था, जो यमुना और चम्बल नदियों पर चलती थीं। चम्बल नदी को मुख्यता दक्षिण के जिलों में भिन्ड और ग्वालियर को पार करने के लिये व्यापारियों के व्दारा प्रयोग किया जाता था जबकि यमुना को विस्तृत रुप से दिल्ली और आगरा के साथ पश्चिम में व्यापार के लिए प्रयोग किया जाता था और पूर्व में कालपी और इलाहाबाद का प्रयोग किया जाता था। जैसे हम पीछे जाते हैं पाँचवी और छठीं शताब्दी में धन काँसे के बर्तन में इकट्ठा किया जाता था या घरों में। ब्याजखोरी को घृणा की दृष्टि से देखा जाता था जब परम्परागत उच्च जाति के सदस्यों के व्दारा किया जाता था यद्यपि वैश्य ब्याज की निर्धारित दर की अपेक्षा अधिक ब्याज लगाते थे। मध्यकालीन युग में विशेषकर अकबर और उसके उत्तराधिकारियों के राज्यों में व्यापार फलफूल रहा था। धनी और सम्पन्न लोगों के पास धन उपलब्ध था। औरैया इलाहाबाद और आगरा के बीच स्थित था और यह कृषि उत्पादन,घी,हस्तनिर्मित कपड़ों का महत्वपूर्ण व्यापार केन्द्र था।

औरैया में एक सरकारी कोषागार था और कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर उपकोषागार थे जैसे फफूँद और औरैया। कोषागार सरकारी बकाये धन को इकट्ठा करने के लिए सरकारी बैंकिंग संस्था के रुप में काम करते थे और सरकार की ओर से व्यय करने का कार्य करते थे। अंग्रेजों ने १८०१ में जिले का प्रशासन लेने के बाद औरैया में अपना कोषागार स्थापित किया था।

२०वीं शताब्दी के प्रारम्भ में अनेकों फर्में थीं जो धन में बहुत आगे थीं। बड़े लेनदेन में बहुमूल्य चीजें जैसे कि जेवरात सुरक्षा के तौर पर साहूकार के पास जमा करते थे। ब्याजदर प्रतिबर्ष ६ प्रतिशत से १२ प्रतिशत तक बदलता रहता था। ब्याज अनुपात के अनुसार सम्पत्ति का मूल्य ऋणी को पूर्व में जमा करना पड़ता था, पूर्व में केवल व्यक्तिगत सुरक्षा पर लिये ब्याज की दर बहुत ज्यादा थी, औसतन प्रतिवर्ष १८ प्रतिशत थी।

व्यापार और वाणिज्य

१९ वीं शताब्दी में अन्तिम ३५ वर्षों में रेलवे संचार की मुख्य धमनी थी। पूर्वी भारतीय रेल सरलता से जिले के प्रत्येक हिस्से में पहुचने योग्य थी। मुख्य निर्यात सूत,कपास,घी,तिलहन और आयात कपड़े का यान धातुयें, चावल, नमक और चीनी थे। घी और गेहूँ ग्वालियर के पड़ोसी क्षेत्रों से निर्यात के लिये जिले में रेलवे स्टेशनों तक पहुँचाया जाता था। २० वीं शताब्दी में समान व्यापार के तरीके से घी, कपास और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात और कपड़ों, सूती धागे और मशीनरी का आयात किया गया था। .

हालांकि ३० वें दशक से सूत का उत्पादन शीघ्रता से कम हो गया और पचासवें दशक से जिले में कपास की खेती नहीं थी। मार्ग के विकास के साथ व्यापार की गति बढ़ गयी थी और रेलेवे के अतिरिक्त जिले में बहुत यात्रियों का सड़कों पर लगातार आवागमन होता है। घी और खाद्यान व्यापार की मुख्य वस्तुयें है। घी पश्चिम में पंजाब तक ले जाया जाता है। पूर्व में बंगाल और दक्षिण में आंध्र प्रदेश तमिलनाडु और दक्षिण पश्चिम में मुम्बई तक भेजा जाता है। गेहूँ यहाँ का मुख्य खाद्यान है, जो जिले के साथ बाजारों से पड़ोसी जिलों में भेजा जाता है।

आन्तरिक बाह्य और व्यापार की अन्य महत्वपूर्ण वस्तुयें चना,धान, दालें और तिलहन हैं। हस्तनिर्मित कपड़ों का उत्पादन भी १९७२-१९७३ से बढ़ गया है। औरैया, इटावा और जसवन्तनगर में हस्तनिर्मित कपड़ों के मुख्य व्यापारिक केन्द्र हैं। बहुत बड़ी मात्रा में दोनों की नदियों और झीलों में मछलियाँ उपलब्ध हैं। मछलियाँ दिल्ली,बिहार और बंगाल को भेजी जाती हैं।

१९७४ में जिले में १२७९ किमी० की रेलवे लाईन थी जो अनेक जिलों में व्यापारिक केन्द्रों को जोड़ती हैं और पड़ोसी जिलों और राज्यों को जोड़ती हैं। यहाँ तीन रेलवे स्टेशन हैं, उत्तरीय रेलवे जिले में कुल लगभग ७० किमी० लम्बी है। जिले की अधोसंरचना इस प्रकार व्यापार को लगातार बढ़ाती है। लगभग ५८५३० व्यक्ति, संयुक्त रुप से इटावा और औरैया में १९९० में व्यापार और वाणिज्य में संयुक्त रुप से इटावा और औरैया में लाइसेन्स धारी व्यापारी थे और लगभग २६० दलाल भी व्यापार और वाणिज्य से जीविका कमाते थे।

लघुउद्योग

औरैया जिला उत्तर प्रदेश का सरकार व्दारा घोषित कार्यरत क्षेत्र मे पिछड़े जिलों में से एक है, केवल दो नगर पालिका दिबियापुर और औरैया मुख्य उद्योगों से औद्योगिक हैं। धान मिल और दाल मिल इन दोनों क्षेत्र में अच्छी तरह से कार्य कर रही हैं। इन जिलों के अतिरिक्त सुसज्जित स्टील, फर्नीचर और सीमेन्ट उत्पादन के लघु उद्योग औरैया जिले में भिन्न-भिन्न जगह पर स्थित है। इन लघु उद्योगों के लिये कच्चामाल, आगरा और कानपुर से आयात किया जाता है।

उत्पादनों को दूर बेचने के लिये जिले में बहुत ही कम सुविधायें हैं। इसलिये बिक्री मुख्य रुप से पड़ोसी जिलों पर निर्भर करती है। मुख्य रूप से चावल,दालें,देशीघी बड़े पैमाने पर जिलों और राज्यों को निर्यात किया जाता है।

औरैया शहर में ही लकड़ी के फर्नीचर का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है और इसकी कीमत और गुणवत्ता के कारण फर्नीचर ने पड़ोसी जिलों के बाजार में एक अच्छी जगह बना ली है।

गेल

गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड, भारत की मुख्य सरकारी उपक्रमों में से देश में सबसे बड़ी गैस वितरक और मार्केटिंग कम्पनी है। कम्पनी को बहुत ही विकसित और कुशल अधोसंरचना संचित करती है। भारत सरकार के व्दारा १०० प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अगस्त १९८४ में गेल को पूर्ण रुप से अधिग्रहण कर स्थापित किया गया था। थोड़े समय के अन्तर्गत यह नवरत्न उद्यमों में से एक हो गयी है और भारत की उच्च शीर्ष १० कम्पनियों के बीच में इसे स्थान दिया जाता है।

गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया (गेल) की उत्तर प्रदेश पेट्रो रसायन कॉम्पलेक्स (यू०पी०पी०सी०) उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में स्थित है। प्राकृतिक गैस के प्रत्येक भाग से मुख्य बढ़ोत्तरी को अधिकतम करने के लिये गेल अभियान के अनुसार इसे स्थापित किया गया था।